प्रेरणा

सर्द रातों में,
जब तुम,
शॉवर के नीचे खड़ी होती हो,
तो पानी की बर्फ सी बूंदे, 
पड़ती हैं तुम पर,
और फिर चिपक जाती हैं,
दीवारों से,
तुम्हारे दीदार के लिये,
पर तब तक तुम,
तौलिया लपेट कर,
बाहर आ जाती हो,
जहाँ मैं लैपटॉप लिये,
बैठा होता हूँ,
बर्फ बनकर…

 

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4 thoughts on “प्रेरणा”

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