Pause

मैं तुम पर आता हूँ तो रुक जाता हूँ उतना ही जितना पहली दफ़ा रुका … Read more

बूमरैंग

(दूसरी किश्त) सितम्बर की दोपहर थी, हल्की सी धूप कॉफ़ी हाउस के काँच वाले दरवाज़े … Read more