आख़िरी दफ़ा

याद का क्या है, आते-आते जायेगी ये तुम्हारी आदत, जाते-जाते जायेगी

जबलपुर

एक पुराना मकानइक्का-दुक्का दोस्तसुनसान पड़ोसथोड़ा रसूख़और बहुत सारायहाँ-वहाँ बिखरा हुआ ग़मअपने शहर के नाम परबस … Read more