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लघु कथा

क्या सुनने आये थे? कि हमेशा देर कर देते हो?

दिसम्बर 30, 2025मार्च 7, 2022

रविवार था आज, फिर भी सुबह जल्दी नींद खुल गयी. रविवार की तौहीन न हो … Read more

Chakresh Surya

चक्रेशहार सिंह सूर्या

बिखरे हुए बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी,
माथे को जकड़े सच्चे-झूठे ख्याल,
ख़ुद को तलाश करती आँखें,
मुश्किलों में भी तनी हुई मूंछें,
बात-बेबात फूट पड़ती ख़ामोश सी हँसी,
और होंठों के पीछे अनकहे-अधूरे किस्से...
फ़िलहाल के लिए तो यही मैं हूँ।

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चवन्नी-अठन्नी-सोलह आना, टाइम मिले तो फिर आना