इंदौर डायरी
पिछले एक महीने में बदलें हैं तो धूप के तेवर. सड़क पर गाड़ियों और गड्ढों … Read more
नज़्मों का घर
पिछले एक महीने में बदलें हैं तो धूप के तेवर. सड़क पर गाड़ियों और गड्ढों … Read more
मन तो करता है कि,अपने अल्फ़ाज़ों को,शहद में भिगोकर,उस पर मिश्री के दाने छिड़ककर,कागज़ पर … Read more
ये तुम्हारा प्यार नहीं तो और क्या है, कि जिस दिन तुम गए, उस दिन … Read more
मैं चार दिन उसके घर में ही ठहरा था, इस दौरान उससे बात कुछ भी … Read more
तुम्हें जब देखता हूँ,तो लगता है ये शहर,नगर और महानगर के बीच,कहीं अटक गया है! … Read more