बातचीत – In a conversation with friends – 2
हर इक बात का ग़र सिर्फ़ एक मतलब होता,तो लोग अपना-अपना मतलब कैसे निकालते ??
नज़्मों का घर
हर इक बात का ग़र सिर्फ़ एक मतलब होता,तो लोग अपना-अपना मतलब कैसे निकालते ??
इतनी रात गए सिर्फ़ अँधेरा ही हाथ लगता हैरूहों से मिलना हो तोसुबह की अज़ान के … Read more
न कोई नज़्म है न कोई इश्तिहार ही ये दीवार भी मेरे दिल की तरह … Read more
सब्ज़ीवाले से पाँच रुपये की मसाला मांगो तो वो धनिया, मिर्ची, कढ़ी पत्ता और अदरक … Read more
इस दुनिया से भी बड़े-बड़े वादों को टूटते देखा है मैंनेवो जब टूटते हैं तो … Read more
रात भर सुलगता रहा जलता भी रहा न चिंगारी थी न आग न धुआँ वहां … Read more
मैंने तुमसे कह तो दिया कि तुम पर मैंने कुछ लिखा है… और तुम भी खामाख्वाह … Read more