ग़लती

मैं… मैं ग़लतियों का पुलिंदा हूँ और ख़ुदकी की ग़लती किसे दिखती है अक्सर नहीं … Read more

रम से हम तक

रम को हम से अच्छा कोई नहीं जानता, हमको हमसे अच्छा कोई नहीं जानता।

आख़िरी दफ़ा

याद का क्या है, आते-आते जायेगी ये तुम्हारी आदत, जाते-जाते जायेगी

कच्चे रिश्ते

मिट्टी के बर्तन में दरार तो साफ़ दिखती है लेकिन वो आयी किस तरफ़ से … Read more

क्यूँ का जवाब

मोहब्बत में जब कोई बदल जाता है उसका सच भी झूठ में बदल जाता है … Read more

बिखरे ख़याल

तुमसे बात करने के बादएक रख दिया था खिड़की के पासकुछ को बुकशेल्फ़दो-चार को फ़्रिज … Read more