ग़लती

मैं… मैं ग़लतियों का पुलिंदा हूँ और ख़ुदकी की ग़लती किसे दिखती है अक्सर नहीं … Read more

आख़िरी दफ़ा

याद का क्या है, आते-आते जायेगी ये तुम्हारी आदत, जाते-जाते जायेगी

बिखरे ख़याल

तुमसे बात करने के बादएक रख दिया था खिड़की के पासकुछ को बुकशेल्फ़दो-चार को फ़्रिज … Read more